Roman writing-रोमन पद्धति में संख्या लेखन

हेल्लो दोस्तों आज के इस पोस्ट में आपको Roman writing के बारे में बताया जा रहा है की क्या होता है और भी बहुत कुछ तो चलिए शुरू करते है

रोमन पद्धति में संख्या लेखन

1. रोमन संख्या में I,V,X,L,C,D,M संकेत चिन्हों का प्रयोग होता है।

2 यहाँ I= 1,V=5,X= 10, L = 50,C= 100,D=500,M = 1000 होता है।

3. यदि किसी छोटी संख्या को दूसरी बड़ी संख्या के दायीं ओर रखा जाता है तो उसके मान में उतना जोड़कर बढ़ा दिया जाता है।

जैसे-XI=10+1=11

इसे भी पढ़े –logarithm

4. यदि किसी छोटी संख्या को दूसरी बड़ी संख्या के बायीं ओर रखा जाता है तो उसके मान में उतना घटाकर पढ़ा जाता है। जैसे-IX = 10-1=9

5.यदि कोई संकेत बार-बार लिखा जाता है तो वह जितनी बार लिखा जाता है उतना गुणा समझा जाता है।

जैसे-Xxxx = 10×4=40

6. V को कभी दुबारा नहीं लिखा जाता है।

7. V को कभी किसी बड़ी संख्या के बाएं लिखकर नयी संख्या नहीं बनायी जाती है।

जैसे-LV=55, होगा । मगर VL=45 नहीं होगा।

8. किसी संख्या का मान एक हजार गुना बढ़ाने के लिए उस संख्या के ऊपर एक सरल रेखा खींची जाती है। जैसे = 10×1000 = 10,000 या = 10000,

रोमन अक्षरों की मान संख्या

 

1. (a) एक अंक की सबसे छोटी संख्या =1

(b) एक अंक की सबसे बड़ी संख्या =9

(c) दो अंक की सबसे छोटी संख्या = 10

(d) दो अंक की सबसे बडी संख्या =99

(e) तीन अंक की सबसे छोटी संख्या = 100

(f) तीन अंक की सबसे बड़ी संख्या = 999.

2.भिन्न को सरल करने का नियम-सबसे पहले का, तब भाग उस और उसके बाद जोड़ एवं घटाव ।

3. कोष्ठक चार प्रकार के होते हैं

(i) छोटा कोष्ठक =()  (i) मंझला कोष्ठक ={} (iii) बड़ा कोष्ठक = [] (iv) रेखा कोष्ठक =—

4. प्राकृत संख्या (Natural Numbers)-गिनती की संख्याओं को प्राकृत सख्या  कहा जाता है। उदाहरण-1,2,3,4,5,6,7,8, ………

5.पूर्ण संख्या (Whole Number)-0 से प्रारंभ होने वाली गिनती की  संख्या पूर्ण सख्या कहलाती है। उदाहरण -0,1,2,3,4,5,6, …

6.धनात्मक पूर्णाक संख्या (Positive Integer)-जिस  प्राकृत संख्याओं धनात्मक होता है उसे धनात्मक पूर्णांक संख्या कहते हैं । उदाहरण-1,2,3,4,5,6,7.

7.ऋणात्मक पूर्णांक संख्या (Negative Integer)-जिन प्राकृत संख्याओं का ऋणात्मक रहता है उसे ऋणात्मक पूर्णांक संख्या कहते हैं । जैसे–1,-2,-3,-4-5

8. पूर्णांक संख्या (Integer)-धनात्मक पूर्णांक संख्या एवं ऋणात्मक पूर्णांक सख्या  मिलकर पूर्णांक संख्या कहलाती है । उदाहरण–3,-2,-1,0,1,2,3,

9.परिमेय संख्या (Rational Number)-वैसो संख्याएँ जिनका हर 0 नहीं होता है

उदाहरण 2/5, -20/9 , √9/25

10. अपरिमेय संख्या (Irrational Number)

वैसी संख्याएँ जिनका वर्गमूल चिन्ह √ के अन्तर्गत हो, परन्तु पूर्ण वर्ग न हो।

उदाहरण √5 , √5/0 , √3+2

11.भाज्य, भाजक, भागफल और शेष

(i) भाज्य (Dividend)-जिस संख्या में भाग दिया जाता है उसे भाज्य कहते हैं।

(ii) भाजक (Divider)- जिस संख्या से भाग दिया जाता है उसे भाजक कहते हैं ।

(iii) भागफल (Quotient)-भाजक द्वारा भाज्य में भाग देने पर जो परिणाम मिल है उसे भागफल कहते हैं।

(iv) शेष (Remainder)-भाज्य में भाजक से भाग देने पर जो शेष बचता है उसे शेष  कहते हैं।

रूढ़ संख्या (Prime Number)

उसं संख्या को रूढ़ संख्या कहा जाता है जिसमे 1 के अतिरिक्त दूसरी संख्या से भाग नहीं लगे। उदाहरण-2,3,5,7,11 …

जुड़वाँ अभाज्य (Twin Prime)

उन अभाज्य संख्याओं के जोड़े को जुड़वाँ  अभाज्य कहा जाता है, जिनमें 2 का अन्तर होता है। जैसे-13 एवं 11, 19 एवं 17

सम संख्या (Even Number)

जिन संख्याओं में दो से भाग लग जाय, उन्हें सम सख्या कहते  हैं । उदाहरण-   8, 12, 18, 16……..

मैथ

reference-https://www.mathsisfun.com/

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